
आप लोगों ने लाई डिटेक्टर या फिर पॉलिग्राफ मशीन के बारे में जरूर सुना होगा । जो ये बताती है कि इंसान सच बोल रहा है या झूठ । तो हैलो दोस्तो मैं Santosh Parmar स्वागत करता हू आपका और इस आर्टीकल में हम बात करने वाले हैं लाइ डिटेक्टर या फिर पॉलिग्राफ मशीन के बारे में कि ये मशीन क्या होती है कैसे काम करती है और इसे कैसे पता चलता है कि इंसान सच बोल रहा है झूठ बोल रहा है और सबसे इम्पॉर्टेंट चीज के कोर्ट में ऐसा एविडेंस जो लाइ डिटेक्टर या फिर पॉलिग्राफ मशीन द्वारा की गए टेस्ट एक्सपैंडेबल है या नहीं । तो चलिए शुरू करते हैं ।
जहां तक बात आती है हम लोगों के डेली रुटीन की तो हम लोग न जाने कितने सच और झूठ बोलते ही रहते हैं । न जाने कितने सच और झूठ हम जानबूझकर बोलते हैं तो न जाने कितने सच और झूठ हम अनजाने में बोल देते हैं । कभी कभी बात इतनी छोटी होती है कि चाहे हम सच बोलें या झूठ बोले उनसे कोई फर्क नहीं पड़ता है लेकिन जब बात आती है ऐसे स्टेटमेंट की जिसके ऊपर काफी सारी चीजें डिपेंड हो जैसे कि कोर्ट की हियरिंग किसी विक्टिम का स्टेटमेंट या सस्पेक्ट का स्टेटमेंट तो ये जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर इंसान सच बोल रहा है या झूठ बोल रहा है । अगर आपको दुनियादारी की ज्यादा समझ है तो आप किसी इंसान के सामने बैठकर थोड़ा बहुत समझ सकते हैं कि वो सच बोल रहा है या झूठ बोल रहा है लेकिन एक्यूरेसी यानी सच्चाई का आपसे दूर दूर तक का कोई लेना देना नहीं होता है । कभी तुक्का लग जाए तो और बात है लेकिन सामने बैठे इंसान से बात करके ये पता लगाना कि वो सच बोल रहा है या झूठ बोल रहा है ये बड़ा ही मुश्किल काम होता है ।
चलिए हम बात करते हैं लाइ डिटेक्टर या फिर पॉलिग्राफ मशीन की सच्चाई के बारे में । अगर कोई इंसान किसी दूसरे इंसान की सच्चाई का पता लगाना चाहे कि वो सच बोल रहा है या झूठ बोल रहा है तो ये मुश्किल है लेकिन अगर यही काम मशीन करे तो एक्युरेसी यानि सच्चाई काफी हद तक बढ़ जाती है । इसी सोच के साथ 1921 मे जॉन लार्सन ने पहली बार इस टेस्ट को डेवलप किया था जो के खुद ही यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के एक मेडिकल स्टूडेंट थे । 1921 के बाद से हम लोगों ने इस टेस्ट में काफी इम्प्रूवमेंट किए हैं और हम लोगों की यही कोशिश रही है कि कैसे इस टेस्ट की एक्यूरेसी को सच्चाई को सत्यता को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाया जा सके । लेकिन आज की डेट में भी ये टेस्ट काफी सारी कंट्रीज में लीगल है तो बहुत सारी कंट्रीज में ये इल्लीगल भी है । इंडिया में ये टेस्ट पूरी तरह से बैन है । जबरदस्ती किसी के ऊपर लाइ डिटेक्टर या फिर पॉलिग्राफ मशीन के द्वारा टेस्ट नहीं किया जा सकता है लेकिन अगर कोई शख्स अपनी इच्छा से टेस्ट कराना चाहता है या कोर्ट किसी शख्स के उपर ये टेस्ट करने का ऑर्डर देती है तो पॉलिग्राफ मशीन के द्वारा उसके ऊपर टेस्ट किया जा सकता है । लेकिन लाई डिटेक्टर या पॉलीग्राफ मशीन के द्वारा किया गया टेस्ट कोर्ट में एविडेंस के तौर पर पूरी तरह से वैलिड नहीं है । पूरी तरह से वैलिड न होने का मतलब ये है कि सिर्फ लाइ डिटेक्टर टेस्ट के आधार पर किसी शख्स को सजा नहीं सुनाई जा सकती है जब तक कि दूसरे एविडेंस अवेलेबल ना हो ।
चलिए हम बात करते हैं कि लाइ डिटेक्टर या फिर पॉलिग्राफ मशीन काम कैसे करती है । इंसान का दिमाग एक प्रोसेसर होता है हम जो भी बोलते हैं वो दिमाग से निकल कर आता है ऐसे में अगर हम झूठ बोलना चाहे तो प्रोसेसिंग तो दिमाग ही करेगा तो ऐसे में हमारे आउटकम थोड़े डिफरेंट हो जाते हैं । जब हम झूठ बोलते हैं तो हमारे ब्लड प्रेशर, पल्स रेट, हाथ और माथे से निकलने वाला पसीना ये सभी वो पैरामीटर्स है जो बदल जाते हैं । ऐसे में आसानी से पता लग जाता है कि इंसान सच बोल रहा है या झूठ बोल रहा है । जिस इंसान पर ये टेस्ट किया जाता है शुरू में उसे उसका नाम पता उम्र वगैरह जैसे सवाल पूछे जाते हैं और फिर अचानक से उसे उस खास दिन की घटना के बारे में पूछा जाता है । इस अचानक सवाल से उस इंसान के ऊपर साइकोलॉजिकल प्रेशर पड़ता है और ग्राफ में बदलाव दिखता है । अगर ग्राफ में बदलाव नहीं दिखता है तो इसका मतलब साफ है कि वो इंसान सच बोल रहा है लेकिन अगर ग्राफ में बदलाव दिखता है तो इसका मतलब होता है कि वो इंसान झूठ बोल रहा है । कुछ लोग ही कहते हैं कि इस टेस्ट की एक्युरेसी यानि सच्चाई सही है तो वहीं कुछ लोगों का ये कहना है कि इस टेस्ट की एक्युरेसी सही नहीं है तो कुछ लोग यही मानना है कि इस टेस्ट को बायपास भी किया जा सकता है जैसे कि हम लोगों ने कई सारी मूवीज में देखा भी है । कुछ बड़ी बड़ी कंपनियां अपने इम्प्लाइज का पॉलिग्राफ टेस्ट कराती हैं ताकि ये जान सकें कि उनके अंदर कितनी ईमानदारी है । पॉलीग्राफ या फिर लाई डिटेक्टर टेस्ट में बहुत सारे प्रश्न पूछे जाते हैं जिनका आंसर यस और नो में देना होता है । इसमें बहुत सारे प्रश्न तो रिलेटेड होते हैं लेकिन बहुत सारे प्रश्न ऐसे भी होते हैं जो रिलेटेड नही होते हैं जिनका केस के साथ कोई लेना देना नहीं होता है । वो प्रश्न इसलिए पूछे जाते हैं ताकि एक बेसलाइन तैयार की जा सके और ये जाना जा सके कि आपके पैरामीटर्स नॉर्मल कंडिशन में कैसे होते हैं और झूठ बोलने की कंडीशन में उनमें क्या क्या चेंजीस देखने को मिल सकते हैं । तो आज के इस आर्टीकल में आपने जाना कि लाई डिटेक्टर टेस्ट या फिर पॉलिग्राफ मशीन टेस्ट क्या होता है और ये कैसे किया जाता है और कोर्ट में ऐसे एविडेंस एक्सेप्ट होते हे या नहीं ।

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